जुखाम, खांसी, गले में खराश ठीक करने के घरेलू उपाय

यह तो आप सभी जानते है कि सर्दियों के मौसम की शुरुआत होते ही लोगों को सर्दी, जुखाम, खांसी, गले में खराश आदि समस्याएं होने लगती हैं, जो 1 या 2 दिन के लिए नहीं बल्कि 1 हफ्ते तक तो चलती ही हैं  क्योंकि एक मात्र यही ऐसा मौसम होता है जिसमे बीमारी कम होने की बजाय और अधिक बढ़ जाती है।

यूँ तो सभी अपनी अपनी क्षमता और सूझ बूझ के अनुसार इनसे बचने और राहत पाने के उपचार करते रहते है लेकिन कई बार ढेरों उपाय / इलाज करने के बाद भी कोई फायदा नहीं होता। ऐसे में केवल घरेलू उपाय ही एकमात्र ऐसा उपाय है जो समस्या को जड़ से खत्म कर देता है और वापस भी नहीं देता।

जी हां, अगर आप भी अक्सर सर्दियों के समय अपनी बीमारियों से परेशान रहते है तो एक बार इन उपायों का इस्तेमाल करके अवश्य देखें।

सर्दी में जुखाम खांसी गले में खराश और टान्सिल्स के लिए आसान उपाय –

हल्दी :-

एक कप दूध में 1 चम्मच हल्दी डालकर गर्म करें और फिर जरा-सी शक्कर डालकर पिला दें। कैसा भी जुखाम हो शर्तिया लाभ होगा।

अदरक :-

अदरक 6 ग्राम, तुलसी के पत्ते 10, कालीमिर्च 7, लौंग 5 – सबको जरा-सा कूट लें, फिर 1 कप पानी में डालकर उबालें। उबल जाने पर उतारकर छान लें और शक्कर मिलाकर पिला दें। दूध न डालें। खांसी और जुखाम में लाभ होगा।
चनों को भूनकर गर्म-गर्म सूंघे, जुखाम के लिये लाभदायक है।

काली मिर्च:-

कालीमिर्च 7 दाने, गुलबनफ्शा 7 ग्राम- दोनों को 250 ग्राम पानी में उबालें। जब चौथाई पानी रह जाए तब उतार लें। जब पीने योग्य हो जाए तब छानकर और चीनी मिलाकर पिला दें। दवा पिलाकर कम्बल उढ़ाकर सुला दें। थोड़ी देर में पसीना आकर तबियत ठीक हो जाएगी, जुखाम पक जाएगा। साधारण खांसी भी दूर हो जाएगी।

लौंग:-

लौंग 3 नग लेकर 100 ग्राम पानी में पकाएं। जब आधा पानी रह जाए तब उतार लें और जरा-सा नमक डालकर पिला दें, जुखाम ठीक हो जाएगा।

कपूर, नौषादर और चूना-

तीनों को समभाग लेकर शीशी में रक्खें। ढक्कन कसकर लगा दें। जब आवश्यकता हो तब शीशी को जोर से हिलाकर सूंघें, बन्द हुआ जुखाम खुल जाएगा और सिर-दर्द दूर हो जाएगा।

रीठे का छिलका और कायफल :-

रीठे का छिलका और कायफल – दोनों को बराबर-बराबर लेकर बारीक पीस लें। बस, दवा तैयार है। इसके नाक में सूंघने से छींक आकर सर्दी, जुखाम, सिर-दर्द और आधे सिर का दर्द दूर हो जाता है।

सोंठ, कालीमिर्च, पीपल:-

तीनों को समभाग लेकर कूट-पीस लें, फिर चौगुना गुड़ मिलाकर बेर के बराबर गोलियां बना लें। 1-1 गोली दिन में तीन बार ताजा पानी से दें। इन गोलियों के सेवन से सिर का भारीपन, कफ और जुखाम ठीक हो जाता है।

मुलहठी, गुलबनफ्शा असली, अजवायन देशी :-

तीनों समभाग लेकर बारीक पीस लें। डेढ़-डेढ़ ग्राम दवा प्रातः-सांय गुनगुने पानी से खिलाएं। नजला, जुखाम, इन्फ्लुएन्जा के लिये अतीव गुणकारी है। जुखाम के कारण होने वाली खांसी भी दूर हो जाती है।

अलसी के बीज, टाँन्सिल में गुणकारी :-

  • अलसी के बीज 50 ग्राम, घी एक चम्मच, पानी 500 ग्राम। अलसी के बीजों को कूट लें, फिर सबको मिलाकर पुलटिस बना लें और सुहाती-सुहाती गले पर बांधें।
  • गले में कैसा ही दर्द हो, सूजन हो, आवाज बैठ चुकी हो, टाँन्सिल बढ़ गये हों – सभी के लिये अद्वितीय दवा है। खुष्क खांसी तो पहले ही दिन समाप्त हो जाती है। आवश्यकतानुसार 5-7 दिन बांधें।
  • मिट्टी का तेल आधा लीटर, हल्दी बारीक पिसी हुई 50 ग्राम, कालीमिर्च 40 ग्राम बारीक पिसी हुई, मुष्क काफूर 50 ग्राम – सब दवाओं को मिलाकर 3-4 घण्टे धूप में पड़ा रहने दें। 24 घण्टे पश्चात् छान लें और फुरेरी से गले में लगाएं।
  • बढ़े हुए टाँन्सिलों के लिये अनुपम इलाज है। पुराने टाँन्सिल भी बिना आॅपरेषन के ठीक हो जाते हैं। इसे मसूड़ों पर लगाने से उनका दर्द भी मिट जाता है। उच्चकोटि का योग है।
  • उपले (कण्डे) की राख 10 ग्राम लेकर इसे आक (मदार, अकवन, आकौड़ा) के दूध में तर कर दें। एक-दो दिन में जब दूध सूख जाए तब छान लें और इसकी नसवार लें। छीकें आकर बन्द जुखाम खुल जाएगा।

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